इन छह सीटों पर झारखंड विधानसभा चुनाव में होगा महासंग्राम।


झारखंड विधानसभा के पहले चरण का चुनाव संपन्न होने के बाद अब सूबे की निगाह दूसरे चरण की 20 सीटों पर है। ये सीटें कई मायने में अहम हैं। अव्वल तो इनमें से अधिकतर विधानसभा क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं। दूसरे इनमें से आधा दर्जन सीटों पर वीवीआईपी उम्मीदवार मैदान में हैं।

मुख्यमंत्री रघुवर दास, विधानसभा अध्यक्ष प्रो. दिनेश उरांव, ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, जल संसाधन मंत्री रामचंद्र सहिस और पूर्व मंत्री सरयू राय के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ मैदान में हैं। इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सबसे रोचक मुकाबला पूर्वी जमशेदपुर में है, जहां मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ उनकी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सरयू राय उन्हें चुनौती दे रहे हैं। 20 सीटों में अभी आठ भाजपा, आठ झामुमो, एक कांग्रेस और दो आजसू के पास है।

सिसई में दिनेश उरांव की प्रतिष्ठा दांव पर
विधानसभा के अध्यक्ष प्रो. दिनेश उरांव सिसई से चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने झामुमो के जिग्गा सुसराण होरो और झाविमो के लोहरमईन उरांव उन्हें चुनौती दे रहे हैं। प्रो. उरांव 2000 और 2014 से यहां जीत हासिल कर चुके हैं। दिनेश उरांव पिछला चुनाव झामुमो को हराकर आए थे। उन्हें 44472 वोट मिले थे, वहीं झामुमो के जिगा सुसरण होरो को 41879 वोट मिले थे। राज्य बनने के बाद से सिसई से भाजपा तीन चुनाव जीत चुकी है। 2009 में कांग्रेस की गीताश्री उरांव जीतीं थी। इस बार विपक्षी गठबंधन में यह सीट झामुमो के खाते में है। यह सीट जंग में
खासी दिलचस्प बन गई है।

सबकी निगाहें पूर्वी जमशेदपुर सीट पर
पूर्वी जमशेदपुर भाजपा की परंपरागत सीट है। यहां से मुख्यमंत्री रघुवर दास लगातार पांच बार जीतकर छठी बार मैदान में हैं। इस बार भाजपा के नेता और सरकार के पूर्व मंत्री सरयू राय ने यहां से चुनाव लड़कर इसे चर्चा में बना दिया है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ को मुख्यमंत्री के खिलाफ उतार दिया है। झाविमो से अभय कुमार्र ंसह चुनाव लड़ रहे हैं। पूरे सूबे की निगाह यहां बनी हुई है। चुनाव प्रचार ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रहा है, लोगों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री को उनके प्रतिद्वंद्वी किस तरह घेर पाते हैं। 2014 में भाजपा से रघुवर दास 70157 वोटों के बड़े अंतर जीते थे। उनके सामने कांग्रेस के आनंद बिहारी दूबे को मात्र 33270 वोट मिले थे। सरयू राय पिछली बार जमशेदपुर पश्चिमी से जीते थे। उन्हें 95346 वोट मिले थे। उनके सामने कांग्रेस के बन्ना गुप्ता थे, जिन्हें 84829 वोट मिले थे। लेकिन इस बार सरयू राय ने क्षेत्र बदल लिया है।
चक्रधरपुर से भाजपा अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ 2019 में चाईबासा से लोकसभा चुनाव हार गए थे। चक्रधरपुर से पार्टी ने फिर मौका दिया है। हालांकि वह पहले भी यहां से जीत चुके हैं। लेकिन इस बार झामुमो और आजसू उनकी घेराबंदी में जुटी हुई है। चक्रधरपुर की चुनावी जंग दिलचस्प हो गया है। उनके लिए जीत हासिल करने बतौर अध्यक्ष बहुत महत्वपूर्ण है।

खूंटी में नीलकंठ पांचवीं बार जीत के लिए कर रहे जंग
खूंटी विधानसभा क्षेत्र भी तीसरी वीआईपी सीट है। यहां से नीलकंठ सिंह मुंडा लगातार चार बार जीत का रिकार्ड बनाए हुए हैं। पांचवीं बार के लिए वह मैदान में हैं। पिछला चुनाव 2014 में वह 21 हजार 515 वोटों के अंतर से जीते थे। उन्होंने झामुमो के जीदन होरो को हराया था। नीलकंठ सिंह मुंडा ग्रामीण विकास मंत्री हैं। इस बार उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। उनके सामने झामुमो से सुशील पाहन और झाविमो से दयामनी बारला मैदान में हैं। इनके अलावा कई और प्रत्याशी इनकी घेराबंदी में जुटे हैं।

जुगसलाई से सहिस को सीट बचाने की चुनौती
जुगसलाई से लगातार जीतनेवाले आजसू के रामचंद्र सहिस रघुवर सरकार में छह महीने पहले जल संसाधन मंत्री बनाए गए। 2014 में उन्होंने झामुमो के मंगल र्कांलदी को 25 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। रामचंद्र सहिस आजसू पार्टी के मुख्य सिपसलार हैं। सुदेश महतो के भरोसेमंद साथियों में हैं। जुगसलाई सीट उनके साथ-साथ पार्टी प्रमुख के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस सीट पर उन्हें एक बार फिर झामुमो से चुनौती मिल रही है।

कई और हैं वीआईपी
इनके अलावा कई अन्य वीआईपी भी इस चरण में झामुमो के चंपई सोरेन सरायकेला से, चाईबासा से भाजपा के जेबी तुबिद, सिमडेगा से झापा के रेजी डुंगडुंग जमशेदपुर पश्चिमी से कांग्रेस के बन्ना गुप्ता पर खास नजर होगी

Source: Livehindustan.com

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